केंद्रीय मंत्रियों के साथ शुक्रवार को बैठक में भाग लेंगे 30 किसान यूनियन
Friday, 13 November 2020 09:56

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चंडीगढ़: कुल 30 किसान यूनियनों ने गुरुवार को सर्वसम्मति से केंद्रीय कृषि कानूनों को लेकर 40 दिनों से अधिक के गतिरोध को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार को केंद्र सरकार की एक बैठक में भाग लेने का फैसला किया। हालांकि, किसान इस बात को लेकर स्पष्ट हैं कि वे नए कृषि कानूनों को स्वीकार नहीं करेंगे और अपनी आजीविका को बचाने के लिए इन्हें निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहेंगे।

बैठक केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में संपन्न होगी।

भारतीय किसान यूनियन (कादियान) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कादियान ने यहां पांच घंटे की लंबी बैठक के बाद मीडिया से कहा, यह (बैठक बुलाना) एक अच्छी पहल है, लेकिन हम केंद्र में भाजपा सरकार द्वारा लागू किए गए काले खेत कानूनों के खिलाफ अपने विरोध के साथ ²ढ़ हैं।

किसान जिन अन्य मुद्दों को उठा रहे हैं, उनमें सब्सिडी वाले डीजल का प्रावधान और हाल ही में लाए गए अध्यादेश, जिसमें पांच साल तक की जेल या एक करोड़ रुपये तक का जुमार्ना या दोनों शामिल हैं।

कादियान ने कहा, यदि वार्ता विफल (शुक्रवार को) होती है, तो हजारों किसान काले कानूनों के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए ट्रैक्टर-ट्रालियों पर सवार होकर 26 नवंबर को दिल्ली पहुंचेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि किसान काली दिवाली मनाने के लिए 'मशाल' जलाएंगे।

इससे पहले वार्ता विफल हो गई थी, क्योंकि किसानों ने कहा था कि कम से कम केंद्रीय कृषि मंत्री को बैठक में उपस्थित होना चाहिए।

कृषि कानूनों के विरोध में एक महीने से अधिक समय के लिए राज्य में माल गाड़ियों की आवाजाही बंद होने से पंजाब की अर्थव्यवस्था पर काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। पंजाब की अर्थव्यवस्था, जिसमें 75 प्रतिशत कृषक समुदाय शामिल हैं, कई हिस्सों में पांच घंटे तक की कटौती के साथ बिजली की कमी का सामना कर रहा है। राज्य में सभी पांच थर्मल सुविधाओं का कार्य कोयला स्टॉक की कमी के कारण प्रभावित हुआ है।

अधिकारियों ने आईएएनएस को बताया कि 24 सितंबर से पंजाब में ट्रेनों को निलंबित कर दिया गया था, क्योंकि किसानों ने कृषि कानूनों के खिलाफ रेल नाकाबंदी अभियान शुरू किया था।

इस सप्ताह की शुरूआत में मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा कृषि कानूनों के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए की गई पहल के मद्देनजर, किसानों की यूनियनों से अपील की थी कि वे राज्य में यात्री ट्रेनों की अनुमति देने के लिए अपनी रेल नाकाबंदी को पूरी तरह से बंद कर दें।

उन्होंने कहा कि सैनिकों सहित लाखों लोगों को होने वाली असुविधा को भी ध्यान में रखें, जो निलंबन के कारण दिवाली के मौके पर अपने घर नहीं आ पा रहे हैं। सिंह ने कहा कि रेल नाकेबंदी खत्म होने से सैनिक और अन्य लोग अपने परिवारों के साथ उत्सव मना सकेंगे।

--आईएएनएस

एकेके/जेएनएस

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