नई दिल्ली: 3 केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर पंजाब-हरियाणा समेत कई राज्यों के किसानों का धरना-प्रदर्शन 8वें दिन में प्रवेश कर गया है। दिल्ली-हरियाणा और यूपी के तकरीबन दर्जन भर बॉर्डर सील हैं, जिससे लोगों को आवाजाही में खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शुक्रवार को 8वें दिन लगातार दिल्ली-एनसीआर के वाहन चालकों को दिक्कत पेश आ रही है। दिल्ली-एनसीआर में आवागमन के लिए वैकल्पिक मार्ग हैं, लेकिन यहां पर लगने वाला जाम लोगों को समस्या भी बढ़ा रहा है। 

वहीं, दिल्ली कूच करने जा रहे मध्य प्रदेश के किसानों ने शुक्रवार सुबह से एनएच 19 पर डेरा डाल दिया है,क्योंकि पलवल पुलिस ने केएमपी एक्सप्रेस से पहले किसानों को रोक लिया है। ट्रैेक्टर-ट्रॉली पर सवार सैकड़ों किसान हाइवे पर जमा हैं। वहीं, वाटर कैनन के साथ बैरिकेडिंगग कर पुलिस भी मौके पर मौजूद है। बृहस्पतिवार शाम से ही एनएच -19 पर किसान ठहरे हुए हैं।

इससे पहले  किसान आंदोलन के सातवें दिन बृहस्पतिवार को भी दिल्ली से सटे हरियाणा और उत्तर प्रदेश के अधिकतर बॉर्डर बंद रहे। गाजियाबाद से दिल्ली की ओर आने वाले मेरठ-दिल्ली एक्सप्रेस-वे को किसानों ने बृहस्पतिवार सुबह ही बंद कर दिया था, लेकिन मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस को नहीं रोका गया। वहीं, दिल्ली-यूपी गेट पर पहले से ही बड़ी संख्या में किसान जुटे हैं, इसलिए पुलिस ने इस रास्ते को बंद कर रखा है। सिंघु बॉर्डर बृहस्पतिवार से और औचंदी बॉर्डर सोमवार देर रात से सील हैं। सबोली, भोपुरा और अप्सरा बॉर्डर भी बंद कर दिया गया था। वहीं, सिंघु और टीकरी बॉर्डर के साथ नोएडा और गाजियाबाद बॉर्डर पर अब भी किसान डटे हुए हैं। 

वहीं, कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग के साथ आंदोलन में जुटे सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर किसानों के बीच सियासी फसल काटने के मंसूबे के साथ राजनीतिक पार्टियां व नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में महीनों सड़क जाम करने वाले शाहीन बाग के प्रदर्शनकारी पहुंच रहे हैं। ये सभी सिंघु बॉर्डर पर किसानों के मंच से अपने मंसूबे को अमलीजामा पहनाते दिखाई देते हैं।

ऐसे में आंदोलन में जुटे कई किसान इससे नाराज हैं। इनका कहना है कि अभी किसान का मुद्दा सवरेपरि है और हम सिर्फ उसी पर बात करना चाहते हैं। जो लोग हमारे साथ हैं वे सिर्फ और सिर्फ हमारी मांगों के बारे में बात करें तो बेहतर होगा।

वहीं, पिछले दो महीने से चल रहे किसान आंदोलन के जल्द ही समाप्त होने के संकेत हैं। विज्ञान भवन में गुरुवार को केंद्र सरकार और किसान संगठनों के बीच चौथे दौर की लंबी वार्ता में पहली बार दोनों पक्षों के बीच विवादास्पद मुद्दों पर सहमति बनी है। केंद्र सरकार ने लचीला रुख अपनाते हुए किसान संगठनों की सभी प्रमुख मांगों पर विचार करने और आशंकाओं को दूर करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी जामा पहनाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। माना जा रहा है कि सरकार प्रस्तावित कानूनों में संशोधनों पर विचार करने को तैयार है। वार्ता के दौरान चिह्न्ति सभी प्रमुख मुद्दों पर दोनों पक्षों में शनिवार को फिर बैठक होगी, जिसमें निर्णायक फैसला हो सकता है। गुरुवार की बैठक में सरकार की ओर से कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल व वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री सोम प्रकाश उपस्थित रहे।

अमृतसर: पिछले दिनों पाकिस्तानी ड्रोन द्वारा भारतीय क्षेत्र में रेेकी करने और बीएसएफ के जवानों द्वारा फायरिंग के मामले सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि पाकिस्तानी ड्रोन ने भारत में हेरोइन व हथियारों की खेप उतारी है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ अब उसे भारतीय तस्करों के साथ मिलकर सुरक्षित जगह पर ठिकाने पर ले जाने की तैयारी कर रही है। हालांकि बीएसएफ और पंजाब पुलिस द्वारा बार्डर आब्जर्विंग पोस्ट कोट रजादा और उसके आसपास लगते गांवों में जबदस्त तलाशी अभियान चलाया जा रहा है, ताकि ड्रोन द्वारा फेंकी गई खेप तस्करों के हाथ न लग सके।

पिछले तीन दिन में पाकिस्तानी ड्रोन भारतीय सीमा में चार बार प्रवेश कर चुका है। खुफिया एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया कि आइएसआइ ड्रोन के जरिए हथियारों की बड़ी खेप भारत भेज चुकी है। उसे ठिकाने के लिए खालिस्तानी आतंकी सीमावर्ती गांवों में रहने वाले पुराने तस्करों का सहयोग ले रहे हैं। अब सुरक्षा एजेंसियां भारत पहुंची उक्त हथियारों की खेप को जल्द से जल्द तलाश कर आतंकी माड्यूल को ध्वस्त करना चाहती हैं। बताया जा रहा है कि बीएसएफ, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां कोट रजादा और आसपास के क्षेत्रों में सर्च अभियान में लगी हैं। आने वाले दिनों में पुलिस को बड़ी सफलता मिल सकती है।

30 नवंबर की रात बीओपी कोट रजादा के जरिए पाकिस्तानी ड्रोन कोहरे और रात के अंधेरे का फायदा उठाते हुए 15 किलोमीटर अंदर आ गया था। हालांकि पहले दिन बीएसएफ की 73 बटालियन के जवानों ने 70 राउंड फायर भी किए थे, लेकिन ड्रोन को गिरा नहीं सके। इसके बाद मंगलवार की रात 11.15 से 11.17, 11.45 से 11.47 और 12.20 से 12.30 के बीच ड्रोन की कई बार आवाज सुनी गई। पाक ड्रोन को गिराने के लिए जवानों ने फायरिंग की, लेकिन वह पाक लौट गया।

बता दें, वर्ष 2019 में सुरक्षा एजेंसियां क्रैश हुए पाकिस्तान ड्रोन के हिस्से बरामद कर चुकी है। दर्जनभर आतंकियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से एक टाइप की छह राइफलें, गोली-सिक्का, मैगजीन बरामद किए जा चुके हैं।

बताया जा रहा है कि जो ड्रोन भारतीय क्षेत्र में रेेकी करते देखा गया है। वह पांच से सात किलोग्राम तक का वजन उठाने में सक्षम है। वह इतने वजन का भार उठाकर वह बीस किलोमीटर का सफर दो किलोमीटर ऊपर उठकर सकता है।

नई दिल्ली: कुलभूषण जाधव मामले  में भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया कि पाकिस्तान कुलभूषण जाधव के मामले को एक और मामले से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। नियमित कांउसलर अभ्यास में शाहनवाज नून को एक भारतीय कैदी मोहम्मद इस्माइल की रिहाई के लिए एक मामले में हमारे उच्चायोग का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि नून ने पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के दबाव में ऐसा बयान दिया जिसके लिए उसके पास कोई अधिकार नहीं है। दोपहर को बताया गया कि उनके पास भारत सरकार या कुलभूषण जाधव का प्रतिनिधित्व करने का कोई अधिकार नहीं है।

श्रीवास्तव ने आगे कहा कि इस्माइल के मामले की कार्यवाही के दौरान पाक अटॉर्नी जनरल ने जाधव से संबंधित मामले को उठाया। हालांकि ये दोनों मामले आपस में जुड़े नहीं हैं। दोपहर को हमारे सीडीए के बारे में उन बयानों की सूचना दी गई है जो सच नहीं हैं और इस मामले में हमारे स्टैंड के उल्लंघन में हैं। 

वहीं, ब्रह्मपुत्र मामले में भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमने उनसे (चीन) यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया है कि अपस्ट्रीम क्षेत्रों में गतिविधियों से डाउनस्ट्रीम राज्यों के हित को नुकसान न पहुंचे। चीनी पक्ष ने कई मौकों पर हमें अवगत कराया कि वे केवल नदी जल विद्युत परियोजनाओं का संचालन कर रहे हैं, जिसमें ब्रह्मपुत्र के पानी का डायवर्जन शामिल नहीं है। 

नई दिल्‍ली: किसान आंदोलन खत्‍म कराने को लेकर सरकार की किसान नेताओं के साथ बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने बताया कि किसान भाइयों ने बहुत सटीकता से अपने विषयों को रखा है। इसमें जो बिंदु निकले हैं उन पर हम सभी की सहमति बनी है। हम जब पांच दिसंबर को अगली बैठक मिलेंगे तो इसको और आगे बढ़ाएंगे। वहीं किसान नेताओं ने भी वार्ता के सकारात्‍मक रहने के संकेत दिए हैं। 

केंद्रीय कृषि मंत्री ने आज गुरुवार को किसानों के साथ हुई बातचीत के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि किसान यूनियन के नेताओं के साथ सरकार के चौथे चरण की चर्चा सकारात्‍मक रही। किसान यूनियन और सरकार दोनों ने ही अपनी बातें रखीं। किसान नेताओं ने बहुत सही और सटीकता से अपने विषयों को रखा है। इसमें जो बिंदु निकले हैं उन पर हम सब लोगों की लगभग सहमति बन गई है। अब पांच दिसंबर को बैठक में सहमति को निर्णायक स्‍तर पर आगे बढ़ाएंगे। 

तोमर ने कहा कि किसान यूनियन और किसानों की चिंता है कि नए कृषि कानूनों से मं‍डी समितियां (Agricultural produce market committee, APMC) खत्म हो जाएंगी। किसानों की यह चिंता दूर करने के लिए सरकार इस बात पर विचार करेगी कि कैसे मं‍डी समितियां सशक्त हों और इनका उपयोग और बढ़ाया जाए। किसान संगठनों की पराली के मसले में एक अध्यादेश पर शंका है। यही नहीं विद्युत एक्ट पर भी उनकी शंका है। इसपर भी सरकार बातचीत करने को तैयार है। 

नई दिल्ली: नए कृषि कानूनों पर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच मीटिंग शुरू हो गई है। विज्ञान भवन में करीब 40 किसान संगठनों के नेता और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के बीच मीटिंग चल रही है।  बैठक से पहले एक किसान नेता ने कहा कि  हम शिक्षित किसान हैं, हम जानते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा है। हम चाहते हैं कि इन कानूनों को वापस लिया जाए। 

नोएडा के डॉ. अंबेडकर मेमोरियल पार्क में किसानों ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ अपना विरोध जारी रखा है। भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) के प्रवक्ता राजीव मलिक ने कहा कि हमारे संगठन के दो सदस्यों ने आज सरकार के साथ वार्ता में भाग लिया। हमने इसमें एमएसपी पर गहन चर्चा की।

कृषि कानून के खिलाफ अब पंजाब में अवॉर्ड वापस कर भी अपना विरोध दर्ज करवाया जा रहा है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के वरिष्ठ नेता प्रकाश सिंह बादल ने अपना पद्म विभूषण सम्मान वापस करने की बात कही है। इसके कुछ ही देर बाद अकाली दल के नेता रहे सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी अपना पद्म भूषण सम्मान लौटाने की बात कही है। 

प्रकाश सिंह बादल (पंजाब के पूर्व सीएम) ने कहा कि उन्होंने किसानों के लिए पूरे जीवन संघर्ष किया। उन्होंने सरकार को एक मजबूत संदेश भेजने के लिए अपना पुरस्कार लौटाया है। किसानों को इन कानूनों की आवश्यकता नहीं है, फिर सरकार उन्हें किसानों पर क्यों थोंप रही है ? शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने भी कहा कि ये कानून किसानों के हित में नहीं है। 

उधर दिल्ली की सीमा पर सुबह से लगे जाम को खत्म करने के लिए ट्रैफिक पुलिस की ओर से एडवाइजरी जारी की गई। पुलिस ने बताया कि टीकरी, झाड़ौदा बॉर्डर हर तरह के ट्रैफिक मूवमेंट के लिए बंद हैं। बदुसराय बॉर्डर केवल लाइट मोटर व्हीकल जैसे कारों और दो पहिया वाहनों के लिए खुला है। झटीकरा बॉर्डर केवल टू व्हीलर ट्रैफिक के लिए खुला है।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से सूचना दी गई है कि हरियाणा जाने वालों के लिए बॉर्डर खुले हुए हैं वाहन चालक यहां से जा सकते हैं। इसमें धनसा, दौराला, कपसेरा, राजोखरी NH 8, बिजवासन / बजघेरा, पालम विहार और डूंडाहेड़ा बॉर्डर खुले हुए हैं। विज्ञान भवन में मीटिंग के दौरान किसानों ने सरकारी खाने को भी ना कर दी, उन्होंने अपने साथ लाया हुआ खाना खाया। 

नई दिल्ली: तमिलनाडु और केरल पर चार दिसंबर को 'बुरेवी' तूफान का खतरा मंडरा रहा है। इसके मद्देनजर मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। उधर पीएम मोदी ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर उन्हें इस आपदा से निपटने के लिए हरसंभव केंद्रीय सहयोग देने का भरोसा दिया है। इस बीच, कन्याकुमारी, तूतीकोरिन, तिरुनेलवेली तथा मदुरै में एनडीआरएफ की टीमें भेज दी गई हैं और नागरकोइल में राहत शिविरें स्थापित की गई हैं।

भारतीय मौसम विभाग की चेतावनी शाखा ने बताया है कि तूफान 4 दिसंबर को तमिलनाडु के तट से टकरा सकता है। इस कारण दक्षिण तमिलनाडु तथा दक्षिण केरल में तीन दिसंबर के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। तूफान के मद्देनजर तमिलनाडु के राज्य मंत्री आरबी उदयकुमार ने बुद्धवार को रामेश्वरम का दौरा किया। उन्होंने कहा कि सभी मछुआरे समुद्र से लौट आए हैं और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को राहत शिविरों में जाने के लिए कहा गया है। 

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलानीस्वामी और केरल के मुख्यमंत्री पी.विजयन से फोन पर हुई बातचीत के बारे में प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर वताया कि हमने बुरेवी तूफान से उत्पन्न स्थितियों पर चर्चा की। केंद्र तमिलनाडु तथा केरल को हरसंभव सहयोग देगा। प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सलामती के लिए प्रार्थना करता हूं।

आइएमडी ने एक बुलेटिन में कहा है कि श्रीलंका के त्रिंकोमाली पहुंचने के बाद बुरेवी के मन्नार की खाड़ी और तमिलनाडु में कन्याकुमारी के आसपास कोमोरिन इलाके की ओर आने की आशंका है। विभाग ने बताया कि उसके बाद वह पश्चिम-दक्षिण पश्चिम की ओर बढ़ेगा और चार दिसंबर की सुबह कन्याकुमारी और पम्बन के बीच दक्षिण तमिलनाडु तट को पार करेगा।

नई दिल्ली: गुरुवार को ट्विटर पर एक बड़ी फाइट देखने को मिली। बेबाक एक्ट्रेस कंगना रनोट इस बार पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ से भिड़ गयीं। कंगना के भड़कने की वजह बना एक वीडियो, जिसे दिलजीत ने शेयर करते हुए कंगना को टैग कर दिया। इस वीडियो में किसान आंदोलन में नज़र आयीं बहुचर्चित बुजुर्ग महिंदर कौर कंगना के शाहीन बाग वाले विवादित ट्वीट का जवाब दे रही हैं। इसके बाद कंगना और दिलजीत के बीच ट्वीट युद्ध छिड़ गया। 

दिलजीत ने महिंदर कौर का वीडियो शेयर करके रोमन पंजाबी में लिखा- आदरणीय महिंदर कौर जी। कंगना रनोट, सबूत के साथ यह सुन लीजिए। बंदे को इतना अंधा भी नहीं होना चाहिए कि कुछ भी बोलता रहे। इस ट्वीट से हुरी तरह भड़कीं कंगना दिलजीत को जवाब दिया- ओ, करण जौहर के पालतू, जो दादी शाहीन बाग में अपनी सिटीज़नशिप के लिए प्रोटेस्ट कर रही थी, वो बिल्किस दादी जी फार्मर्स के एमएसपी के लिए भी प्रोटेस्ट करते हुए दिखी। महिंदर कौर जी को तो मैं जानती भी नहीं। क्या ड्रामा चलाया है तुम लोगों ने? इसे अभी बंद करो।  

इसी के ट्वीट के जवाब में कंगना ने लिखा- सुनो गिद्धों मेरी ख़ामोशी को मेरी कमज़ोरी मत समझना, मैं सब देख रही हूं। किस-किस तरह से तुम झूठ बोलकर मासूमों को भड़का रहे हो और उनको इस्तेमाल कर रहे हो, जब शाहीन बाग़ की तरह इन धरनों का रहस्य खुलेगा तो मैं एक शानदार स्पीच लिखूंगी और तुम लोगों का मुंह काला करूंगी- बब्बर शेरनी।

नई दिल्ली: नए कृषि कानूनों पर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच मीटिंग शुरू हो गई है। विज्ञान भवन में करीब 40 किसान संगठनों के नेता और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के बीच मीटिंग चल रही है।  बैठक से पहले एक किसान नेता ने कहा कि  हम शिक्षित किसान हैं, हम जानते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा है। हम चाहते हैं कि इन कानूनों को वापस लिया जाए। 

कृषि कानून के खिलाफ अब पंजाब में अवॉर्ड वापस कर भी अपना विरोध दर्ज करवाया जा रहा है। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और अकाली दल के वरिष्ठ नेता प्रकाश सिंह बादल ने अपना पद्म विभूषण सम्मान वापस करने की बात कही है। इसके कुछ ही देर बाद अकाली दल के नेता रहे सुखदेव सिंह ढींढसा ने भी अपना पद्म भूषण सम्मान लौटाने की बात कही है। 

प्रकाश सिंह बादल (पंजाब के पूर्व सीएम) ने कहा कि उन्होंने किसानों के लिए पूरे जीवन संघर्ष किया। उन्होंने सरकार को एक मजबूत संदेश भेजने के लिए अपना पुरस्कार लौटाया है। किसानों को इन कानूनों की आवश्यकता नहीं है, फिर सरकार उन्हें किसानों पर क्यों थोंप रही है ? शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने भी कहा कि ये कानून किसानों के हित में नहीं है।

उधर दिल्ली की सीमा पर सुबह से लगे जाम को खत्म करने के लिए ट्रैफिक पुलिस की ओर से एडवाइजरी जारी की गई। पुलिस ने बताया कि टीकरी, झाड़ौदा बॉर्डर हर तरह के ट्रैफिक मूवमेंट के लिए बंद हैं। बदुसराय बॉर्डर केवल लाइट मोटर व्हीकल जैसे कारों और दो पहिया वाहनों के लिए खुला है। झटीकरा बॉर्डर केवल टू व्हीलर ट्रैफिक के लिए खुला है।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ओर से सूचना दी गई है कि हरियाणा जाने वालों के लिए बॉर्डर खुले हुए हैं वाहन चालक यहां से जा सकते हैं। इसमें धनसा, दौराला, कपसेरा, राजोखरी NH 8, बिजवासन / बजघेरा, पालम विहार और डूंडाहेड़ा बॉर्डर खुले हुए हैं। विज्ञान भवन में मीटिंग के दौरान किसानों ने सरकारी खाने को भी ना कर दी, उन्होंने अपने साथ लाया हुआ खाना खाया। 

नई दिल्ली: भारत में कोरोना की वैक्सीन को लेकर एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने करोड़ों लोगों को खुशखबरी देने वाला बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में कोरोना वैक्सीन का ट्रायल अंतिम चरण में है। उम्मीद है कि इस महीने के अंत तक या अगले महीने की शुरुआत में हमें सफलता मिल जाएगी। गुलेरिया ने कहा कि उम्मीद है कोरोना की वैक्सीन जनवरी तक देश में आ जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए भारतीय नियामक अधिकारियों (Indian regulatory authorities) से आपातकालीन इजाजत मिलनी चाहिए ताकि जनता को वैक्सीन देना शुरू किया जा सके।

रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोरोना के टीके की सुरक्षा और प्रभावकारिता से बिल्कुल भी समझौता नहीं किया गया है। 70,000-80,000 लोगों को टीका दिया गया, कोई गंभीर प्रतिकूल प्रभाव नहीं देखा गया। डेटा से पता चलता है कि अल्पावधि में टीका सुरक्षित है।

डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा कि शुरुआत में टीका सभी को देने के लिए पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होगा। हमें यह देखने के लिए एक प्राथमिकता सूची की आवश्यकता है कि हम उन लोगों का टीकाकरण करें जिनको कोरोना के कारण मरने की संभावना अधिक है। बुजुर्ग, कॉमरेडिटी वाले लोगों और फ्रंट लाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को कोरोना का टीका सबसे पहले लगाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि टीके शरीर को अच्छी मात्रा में एंटी-प्रोडक्शन देंगे और कोरोना वायरस से सुरक्षा देना शुरू कर देंगे। यह कई महीनों तक चलेगा। हमें इम्यूनिटी वैक्सीन के प्रकार देखने की जरूरत है।

एम्स के निदेशक गुलेरिया ने कहा कि वैक्सीन रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज बनाने और इसे सुरक्षित रखने के लिए काम चल रहा है। इसके अलावा केंद्र और राज्य स्तर पर टीकाकरण वितरण योजना के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। चेन्नई में कोरोना वैक्सीन के ट्रायल पर प्रभाव को लेकर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जब हम बड़ी संख्या में लोगों को टीका लगाते हैं, तो उनमें से कुछ को कोई न कोई बीमारी हो सकती है, जो टीके से संबंधित नहीं हो सकती।

नई दिल्ली: कृषि और संबद्ध क्षेत्र में सुधार के कार्यक्रमों को लागू करने के मकसद से केंद्र सरकार द्वारा कोरोना काल में लागू तीन कृषि कानूनों के विरोध में सड़कों पर उतरे किसान फसलों की एमएसपी की गारंटी चाहते हैं। इसलिए, वे एमएसपी कानून की मांग कर रहे हैं। सरकार का कहना है कि इस तरह की मांग अव्यावहारिक है। केंद्र सरकार हर साल 22 फसलों के लिए एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा करती है, जिसका मकसद किसानों को उनकी फसलों का वाजिब व लाभकारी मूल्य दिलाना है। ऐसे में सवाल पैदा होता है कि कानून बनाकर किसानों को फसलों की गारंटी देना क्यों अव्यावहारिक है। इस सवाल पर आर्थिक विषयों के जानकार बताते हैं कि इससे सरकार के बजट पर भारी बोझ बढ़ेगा।

विशेषज्ञों के राय में किसानों द्वारा एमएसपी की गारंटी की इन पांच कारणों से अव्यावहारिक है:

1. सरकार द्वारा घोषित 22 फसलों के मौजूदा एमएसपी पर सभी फसलों की खरीद अगर सरकार को करनी होगी तो इस पर 17 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होगा जबकि केंद्र सरकार की राजस्व प्राप्तियां सिर्फ 16.5 लाख करोड़ रुपये है। कृषि अर्थशास्त्र के जानकार विजय सरदाना द्वारा किए गए इस आकलन के अनुसार, देश के कुल बजट का करीब 85 फीसदी किसानों से एमएसपी पर फसलों की खरीद पर ही खर्च हो जाएगा। वह कहते हैं कि इसके अलावा केंद्र सरकार उर्वरक पर जो अनुदान देती है वह एक लाख करोड़ रुपये के करीब है जबकि फूड सब्सिडी भी करीब एक लाख करोड़ रुपये है। केंद्र सरकार की आमदनी 16.5 लाख करोड़ रुपये है जबकि किसानों की यह मांग मान ली जाए तो कुल केंद्र सरकार पर 17 से 19 लाख करोड़ रुपये का बोझ बढ़ेगा। ऐसे में देश की सुरक्षा के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी समेत तमाम खर्च के लिए पैसा नहीं बचेगा।

2. एमएसपी अनिवार्य करने की सूरत में हमेशा सस्ता आयात बढ़ने की आशंका बनी रहेगी क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अगर कृषि उत्पादों के दाम भारत के मुकाबले कम होंगे तो देश के निजी कारोबारी किसानों से फसल खरीदने के बजाय विदेशों से आयात करेंगे। ऐसे में सरकार को किसानों से सारी फसलें खरीदनी होगी।

3. अगर सरकार किसानों से सारी फसलें एमएसपी पर खरीदेगी तो इसके बजट के लिए करों में करीब तीन गुना वृद्धि करनी होगी। जिससे देश के करदाताओं पर कर का बोझ बढ़ेगा।

4. करों में ज्यादा वृद्धि होने से देश में निवेश नहीं आ पाएगा और रोजगार के नए अवसर पैदा नहीं हो पाएंगे जिससे अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ेगा।

5. एमएसपी में वृद्धि होने और वस्तुओं पर करों व शुल्कों की दरें बढ़ाने पर देश का निर्यात प्रभावित होगा। विशेषज्ञ बताते हैं कि एमएसपी पर फसलों की खरीद की गारंटी देने के लिए कानून बनाने से देश की अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी।

कृषि अर्थशास्त्री विजय सरदाना कहते हैं कि अगर एमएसपी को अनिवार्य कर दिया गया तो कर का बोझ बढ़ने के कारण देश के उद्योग-धंधे बंद हो जाएंगे और भारत अपनी जरूरतों के लिए चीन से सस्ते माल के आयात पर निर्भर हो जाएगा और देश की स्थिति पाकिस्तान से भी ज्यादा खराब हो जाएगी।

--आईएएनएस

पीएमजे-एसकेपी

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